अभिप्रेरणा का अर्थ, परिभाषा, प्रकार और सिद्धांत

अभिप्रेरणा/Motivation का अर्थ –

अभिप्रेरणा वह प्रेरक शक्ति है जो हमें किसी कार्य को करने के लिए मजबूर करती है। अभिप्रेरणा के लिए जो शब्द अंग्रेजी भाषा में उपयोग में लाया जाता है उसे निम्न प्रकार से समझ सकते है-
Motivation लैटिन भाषा के Motum से बना जिसका अर्थ  To move / गति देना /धक्का देना होता है।

 

Abhiprerna

 

 अभिप्रेरणा/Motivation से सम्बंधित परिभाषाएं –

स्किनर – “अभिप्रेरणा अधिगम का सर्वोच्च राजमार्ग /स्वर्ण पथ/ह्रदय होती है।”

विलियम मैक्डूगल – “अभिप्रेरणाएँ वे शारीरिक एवं मनोदैहिक दशाएँ होती है जो हमें किसी कार्य को करने के लिए प्रेरित करती है।”

श्रीमती गुड एन एफ – “किसी कार्य को आरम्भ करने, जारी रखने व नियमित बनाने की प्रक्रिया ही अभिप्रेरणा है।”

 

अभिप्रेरणा/Motivation के सिद्धांत –

1. उद्दीपन-अनुक्रिया का सिद्धांत –

– यह सिद्धांत स्किनर के द्वारा दिया गया।
– स्किनर के अनुसार कोई भी अभिप्रेरणा किसी उद्दीपक के द्वारा आने वाले प्रभाव जो कि उद्दीपन कहलाता है के कारण प्राणी में होने वाली अनुक्रिया है।

 

2. चालक का सिद्धांत-

– यह सिद्धांत क्लॉर्क लियोनार्ड हल के द्वारा दिया गया।
– इस सिद्धांत के अनुसार किसी भी अभिप्रेरणा के लिए चालक महत्वपूर्ण होता है चालक जितना तीव्र होता है अभिप्रेरणा उतनी ही अधिक कार्य करती है।

जैसे- भूख रूपी चालक पैदा होने पर ही व्यक्ति भोजन करने का प्रयास करता है।

 

3. प्रोत्साहन का सिद्धांत

– यह सिद्धांत बोल्फ एवं कॉफमैन के द्वारा दिया गया।
– प्रोत्साहन के रूप में कोई भी वस्तु या क्रिया व्यक्ति को सुनिश्चित रूप से कार्य करने के लिए प्रेरित करती है,

जैसे – एक व्यक्ति नौकरी इसलिए करना चाहता है कि नौकरी करने से उसको वेतन के रूप में प्रोत्साहन मिलता है।

 

4. मनोविश्लेषणवाद का सिद्धांत –

– यह सिद्धांत सिगमण्ड फ्रायड के द्वारा दिया गया।
– फ्रायड के अनुसार निम्न प्रकार की दो प्रवृतियां पाई जाती है जो हमें किसी कार्य को करने के लिए प्रेरित करती है-
1. इरोज- जन्म से संबंधित/निर्माणात्मक प्रवृत्तियां।
2. थनैटॉस- मृत्यु से संबंधित/विध्वंसात्मक प्रवृत्तियां

 

5. उपलब्धि-अभिप्रेरणा का सिद्धांत-

– यह सिद्धांत डेविड सी मैक्लीऐंड तथा एटफिंसन के द्वारा दिया गया।
– इस सिद्धांत के अनुसार किसी भी व्यक्ति के लिए जो अवसरों की उपलब्धता होती है वह उसे कोई कार्य करने के लिए प्रेरित करती है तथा वह प्रेरणा उसके कार्यों में गति को पैदा करती है।
जैसे- भर्ती विज्ञापन आने पर ही एक प्रतियोगी तैयारी शुरू करता है।

 

6. आवश्यकता पदानुक्रम का सिद्धांत

– यह सिद्धांत अब्राहम मेस्लो के द्वारा दिया गया।
– मेस्लो ने आत्मसिद्धि प्रत्यय का अध्ययन किया और यह स्पष्ट किया कि वह आत्मासिद्धि (पूर्ण संतोष) की प्राप्ति के लिए कुछ आवश्यकताओं की पूर्ति करता हुआ अंतिम रूप से आत्मसिद्धि की प्राप्ति करता है।
– मेस्लो ने इन आवश्यकताओं को एक निश्चित पदानुक्रम में व्यवस्थिति करते हुए एक मॉडल पिरामिड़ के रूप में प्रस्तुत किया।

 

7. मूल प्रवृत्ति का सिद्धांत – विलियम मैक्डूगल

– विलियम मैक्डूगल के अनुसार 14 प्रकार की मूल प्रवृत्तियां होती है जो व्यक्ति को कार्य करने के लिए प्रेरित करती है तथा प्रत्येक मूल प्रवृत्ति किसी संवेग से संबंधित होती है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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