हरित ग्रह प्रभाव क्या है -What Is Greenhouse Effect?

Greenhouse Effect :- वातावरण की सामान्य अवस्था में जब सूर्य की किरणों से जब पृथ्वी गर्म हो जाती है तो पृथ्वी अधिकतर ऊष्मा को वापस लौटा देती है, इस तरह पृथ्वी अत्यधिक गर्म होने से बच जाती है लेकिन कुछ दशकों से कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाने से पृथ्वी के तापमान में वृद्धि हुई है।

Green House

क्योंकि यह गैस ताप को अवशोषित कर लेती है।

ग्रीनहाउस प्रभाव वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा सूर्य से निकलने वाले विकिरण ग्रीनहाउस गैसों द्वारा अवशोषित कर लिए जाते है और ये विकिरण वापस लौट नहीं पाती जिससे पृथ्वी के तापमान में वृद्धि होती है।

Greenhouse क्या है ?

Greenhouse(हरितगृह) कांच के बने हुए घर है जिनमे पौधों को उगाया जाता है। सूर्य से आने वाली किरणें पौधों को प्राप्त होती है जो कि पौधों की व्रद्धि के लिए जरूरी होती है ,ये किरणें वापस कांच के बाहर नहीं जा पाती क्योंकि पौधे इसको अवशोषित कर लेते हैं। ऐसा ठंडे क्षेत्रों में पौधों को उगाने के लिए किया जाता है।
कांच(glass) के बने हुए इन घरों को Green house कहा जाता है।

इसी तरह Earth पर आने वाली सूर्य की विकिरणों को Green house gases अवशोषित कर लेती है जिससे पृथ्वी का तापमान बढ़ जाता है जो कि वैश्विक ताप यानि Global Warming का कारण बनता है।

Greenhouse Gases क्या है

ग्रीनहाउस गैसें अवरक्त विकिरणों (infrared radiations) को अवशोषित करती हैं तथा greenhouse effect उत्पन्न करती हैं यानि सूरज की किरणों को अवशोषित कर धरती के वातावरण को गर्म रखती हैं।
अगर Greenhouse gases ना हो तो धरती का वातावरण ठंडा ही रहेगा ।

पृथ्वी के पर्यावरण में उपस्थित Greenhouse Gases:-

  • ● water vapor
  • ● carbon dioxide Gas
  • ● Methane Gas
  • ● Nitrous oxide Gas
  • ● CFC (Chlorofluorocarbons)

Effects of Green house 

ग्रीन हाउस प्रभाव से त्वचा तथा फेफड़ों की बीमारियों में वृद्धि हुई है।
ताप बढ़ जाने के कारण ध्रुवों (poles) पर बर्फ के पिघलने का खतरा बढ़ गया है जिससे कि समुद्र तल में भी वृद्धि हो रही है।

Greenhouse प्रभाव से पर्यावरण काफी प्रभावित होता है इसके कारण पौधों की वाष्पोत्सर्जन की दर में भी वृद्धि होती है।

Greenhouse प्रभाव के कारण Global warming का खतरा उत्पन्न हो गया है।

Greenhouse gases  बढ़ने के कारण/प्रभाव 

1. औद्योगिकरण (industrialization) -:

औद्योगिकरण यानि फैक्टरियों की संख्या में वृद्धि , वाहनों का अत्यधिक उपयोग आदि के कारण कार्बन डाई ऑक्साइड गैस की मात्रा में वृद्धि हुई है।

2. वनों का विनाश (Deforestation) -:

पेड़-पौधे कार्बन डाई ऑक्साइड का उपयोग करने प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा अपना भोजन बनाते हैं तथा पर्यावरण में ऑक्सीजन गैस मुक्त करते है। दिनों- दिन हो रहे वनों के विनाश से वातावरण में कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा में वृद्धि हो रही है यह गैस ताप को Absorp करके धरती के ताप को बढ़ा देती है जो कि पर्यावरण के लिए हानिकारक है।

3. CFC के उपयोग में वृद्धि (Use of CFC) -:

यह गैस रेफ्रिजरेटर, AC आदि में उपयोग में लायी जाती है यह गैस ओज़ोन परत को नुकसान पहुंचाती है ,ओजोन परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों को धरती पर आने से रोकती हैं । आजकल इन गैस के उपयोग में वृद्धि हुई है।

CFC के विघटन से क्लोरीन गैस मुक्त होती है जो ozone layer को नुकसान पहुंचाती है।

4.ओज़ोन परत का क्षय (Depletion of Ozone Layer) –

greenhouse गैस की मात्रा में वृद्धि से ओज़ोन परत का क्षय हो रहा है, यह परत पराबैंगनी किरणों को धरती पर आने से रोकती है जो कि हानिकारक किरणे है तथा ये त्वचा की कई बीमारियों को उत्पन्न करती हैं।

Global warming 

ग्लोबल वार्मिंग CO2, CFC और अन्य प्रदूषकों स्तर के बढ़ने के कारण greenhouse effect वृद्धि होने से पृथ्वी के तापमान में धीरे-धीरे वृद्धि हुई है, इसे ही Global warming (वैश्विक तापमान) कहा जाता है।

Global warming का प्रमुख कारण greenhouse गैसों द्वारा उत्पन्न किया गया greenhouse प्रभाव है।

Global warming के दुष्प्रभाव 

1. जलवायु परिवर्तन (changes in Climate)

2. समुद्र तल में वृद्धि

3. ध्रुवों पर बर्फ पिघलने का खतरा

4. मानव जीवन पर प्रभाव

5. जीव-जंतुओं पर प्रभाव

6. Ozone परत का क्षय

7. रोगों का बढ़ना

8. प्राकृतिक आवासों का नष्ट होना

Cause of Global warming 

1. जनसंख्या वृद्धि

2. वाहनों का अधिक उपयोग

3. वनों का विनाश

4. Factories

5. CFC का अधिक उपयोग

6. ज्वालामुखी का फटना

ओज़ोन परत (Ozone Layer) 

ओज़ोन परत सूर्य से आने वाली हानिकारक किरणो जैसे पराबैंगनी किरणों (Ultraviolet Rays) को धरती पर आने से रोकती है तथा एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है।
इसका formula O3 होता है यानि यह ऑक्सीजन के 3 अणुओं से मिलकर बनी होती है।

ओज़ोन परत के क्षय होने से यह परत पतली होती जा रही है।

Ozone परत पृथ्वी से 15 से 35 km. ऊपर स्थित है यह समताप मण्डल( Stratosphere) के नीचे तथा क्षोभमंडल
(Troposphere) के ऊपरी भाग में स्थित है।

क्षोभमंडल -: Lowest layer of Earth’s atmosphere

 

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