What Is Women’s Reservation Bill ?

Women’s Reservation Bill , 2023 या ‘‘Nari Shakti Vandan Adhiniyam” बुधवार को लोकसभा में भारी बहुमत से पारित हो गया। Bill में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई या 33% सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। विधेयक को गुरुवार को राज्यसभा से सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई |


चर्चा में क्यों ?

मंगलवार को नए संसद भवन में उद्घाटन सत्र के दौरान पेश किया गया Women’s Reservation Bill/महिला आरक्षण विधेयक (128वां संशोधन विधेयक) राजनीति में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने और सुनिश्चित करने की दिशा में एक प्रगतिशील कदम है। यह प्रस्तावित संशोधन निर्णय लेने की भूमिकाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें राजनीति के क्षेत्र में अधिक महत्वपूर्ण आवाज प्रदान करने के प्राथमिक उद्देश्य से तैयार किया गया है। नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा Women’s Reservation Bill 2023 को लोकसभा तथा राज्यसभा से पारित करवा लिया गया है |

संविधान (128वां संशोधन) विधेयक – नारी शक्ति वंदन अधिनियम – कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा राज्यसभा में पेश किया गया। यह बिल बुधवार को लोकसभा से पारित हो गया। विधेयक के अनुसार, यह लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के बाद लागू होगा जो अगली जनसंख्या जनगणना के पूरा होने के बाद किया जाएगा।

  • महिला आरक्षण बिल लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत से पास, समर्थन में 454 वोट पड़े |
  • राज्यसभा द्वारा भी गुरुवार को ऐतिहासिक महिला आरक्षण विधेयक पारित कर दिया, जिसके पक्ष में 214 सांसदों ने मतदान किया और विरोध में किसी ने भी मतदान नहीं किया।
एक विशेष सत्र के दौरान नई इमारत में स्थानांतरित होने के बाद संसद द्वारा उठाया गया यह पहला विधेयक था।

Women’s Reservation Bill के प्रावधान ?

  • Bill में लोकसभा, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की विधानसभा और राज्य की विधानसभाओं में महिला सदस्यों की सभी तीन श्रेणियों – सामान्य (जिसमें OBC शामिल है), अनुसूचित जाति(SC) और अनुसूचित जनजाति(ST) में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया है। इसमें कहा गया कि इस संवैधानिक संशोधन के तहत अनुच्छेद 330 (A) और अनुच्छेद 332 (A) के माध्यम से महिला आरक्षण का प्रावधान किया गया है|
  • तीनों श्रेणियों में Vertical Reservation देकर एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं |
  • आरक्षित की जाने वाली एक तिहाई सीटों का चयन परिसीमन आयोग/Delimitation Commission द्वारा किया जाएगा जो की 2026 के बाद किया जायेगा |
  • विधेयक में प्रस्ताव है कि आरक्षण 15 साल तक जारी रहेगा।
परिसीमन आयोग/Delimitation Commission एक महत्वपूर्ण संस्था का कानूनी प्रावधान है जो हमारे देश की चुनाव प्रक्रिया को निर्धारित करता है और यह नियुक्ति द्वारा किया जाता है लेकिन इसमें अर्ध न्यायिक कार्यवाही होती है। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश करते हैं और इसमें चुनाव आयोग का एक प्रतिनिधि भी होता है | आरक्षित की जाने वाली एक तिहाई सीटों का चयन परिसीमन आयोग द्वारा किया जाएगा|

Women Reservation का इतिहास

सर्वप्रथम 1931 में तीन महिला संगठनों ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री को एक पत्र भेज कर राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान महिलाओं के लिए राजनीतिक आरक्षण का अनुरोध किया था | इसके पश्चात 1935 के भारत सरकार अधिनियम ने महिलाओं को अलग निर्वाचक मंडल दिया लेकिन विधायिकाओं में उनके लिए सीटें आरक्षित नहीं की गई थी, लेकिन भारत में इसे महिलाओं के लिए राजनीतिक भागीदारी की दिशा में पहले कदम के रूप में देखा जा सकता है |

भारत की आजादी के समय भी संविधान सभा की बहसों में महिला आरक्षण के मुद्दे पर कई बार चर्चा हुई परंतु इसे इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि लोकतंत्र को सभी समूह को प्रतिनिधित्व प्रदान करना चाहिए |
1971 में पहली बार एक समिति ने स्थानीय निकायों में महिलाओं के आरक्षण की सिफारिश की थी |

इसके बाद 1988 में महिलाओं के लिए राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के तहत महिलाओं के लिए स्थानीय निकायों में आरक्षण की सिफारिश की गई |इन्हीं सिफारिशों के चलते हुए संविधान में 73 में हुआ 74 में संशोधन हुए जिनके तहत सभी राज्य सरकारों को स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीट आरक्षित करने का आदेश दिया गया |

पिछली सरकारों द्वारा चार बार प्रयास किए गए हैं। महिला आरक्षण विधेयक सबसे पहले 1996 में श्री एच.डी. देवेगौड़ा  के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा लाया गया था, जिसके बाद इसे सीमा मुखर्जी की अध्यक्षता वाली एक समिति को दे दिया गया। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट भी दी लेकिन वह बिल इस सदन तक कभी नहीं पहुंच सका |  इसके बाद श्री अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व वाली सरकार 1998 में यह विधेयक लेकर आयी, लेकिन विपक्ष ने इसे सदन में पेश नहीं होने दिया |  श्री अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व वाली सरकार एक बार फिर विधेयक लेकर आई लेकिन फिर चर्चा नहीं हो सकी। डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार फिर से राज्यसभा में संशोधन विधेयक लेकर आयी, जहां पारित होने के बाद यह विधेयक लोकसभा में नहीं आ सका| (राज्यसभा ने 9 मार्च, 2010 को महिला आरक्षण विधेयक पारित/Women's Reservation Bill किया था लेकिन लोकसभा ने नहीं )|

भारत में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी के लिये समय – समय पर विभिन्न कदम उठाये गए और उन्हीं का नतीजा आज हमें नारी शक्ति वंदन अधिनियम के रूप में दिखा है |

Women Reservation की वर्तमान स्थिति

पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण क्रमशः संविधान (73वें संशोधन) अधिनियम, 1992 और संविधान (74वें संशोधन) अधिनियम, 1992 के माध्यम से संविधान में अनुच्छेद 243D और 243T को शामिल करके प्रदान किया गया था।

महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और केरल जैसे कई राज्यों ने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिये 50% आरक्षण सुनिश्चित करने हेतु कानूनी प्रावधान किये हैं।


FAQ

Que. Which article provides reservation for women/कौन सा अनुच्छेद महिलाओं के लिए आरक्षण प्रदान करता है?
Ans. पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण क्रमशः संविधान (73वें संशोधन) अधिनियम, 1992 और संविधान (74वें संशोधन) अधिनियम, 1992 के माध्यम से संविधान में अनुच्छेद 243D और 243T को शामिल करके प्रदान किया गया था।

Que. What is the amendment for women’s reservation?
Ans. संविधान 108वां संशोधन विधेयक, 2008 लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सभी सीटों में से एक तिहाई (33%) आरक्षित करने का प्रावधान करता है। आरक्षित सीटें राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में रोटेशन द्वारा आवंटित की जा सकती हैं।

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